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सफलता की खुशबू की खनक बड़ी गहरी होती है !

Written By ब्‍लोग चौपाल on Wednesday, 2 May 2012 | 10:09

रवीन्द्र प्रभात
साझा संवाद,साझी विरासत,साझी धरोहर, साझा मंच आप जो मान लीजिये परिकल्पना ब्लॉगोत्सव  की एक कैफियत यह भी है . दरअसल हमारी असली ताक़त आप है और आपकी पसंद ,इच्छा, अनुभूति और सरोकार के अनुरूप ही हम प्रतिदिन कुछ न कुछ नया लेकर आते हैं, ताकि आप हंमारी अनुभूतियों में अपनी अनुभूतियों को पूरे गर्मजोशी के साथ शामिल कर सकें, क्योंकि मेरा मानना है कि सामूहिकता की सांस में सफलता की खुशबू की खनक बड़ी गहरी होती है . इससे हमारा मान भी बढ़ता है और मनोबल भी . 
संभव है कि जो लोग सरसरी निगाह से इस उत्सव को देख-सुन रहे होंगे उन्हें इस वर्ष पिछले वर्ष जैसा उत्साह भी नहीं दिख रहा होगा … विवधता नहीं दिख रही होगी .. भागीदारी नहीं दिख रही होगी … उन्हें यह भी महसूस हो रहा होगा कि कुछ रचनाकार एक हफ्ते में कई बार आ गए… उनके द्वारा  रचनाओं की कमी का अंदाजा लगाया जा रहा होगा … और आधार भी संकुचित दिख रहा होगा …. उनके कुछ पुराने ब्लोगर मित्र इस बार नहीं दिख रहे होंगे .. उन्हें उनकी अनुपस्थिति चौकाने वाली दिख रही होगी …. पाठको की संख्या भी न्यूनतम महसूस हो रही होगी … उन्हें लग रहा होगा कि इस से अधिक पाठक तो आम मौके और आम ब्लॉग पर पहुच जाते हैं….आदि-आदि !
आज मैं आपके मन की बात को लेकर उपस्थित हूँ . आप सोच रहे होंगे कि एक बार फिल्मफेयर या राष्ट्रीय पुरस्कार पा कर यदि फिल्मे बनना छोड़ दे तो मुझे लगता है हम ढेर सारी अच्छी फिल्मों से वंचित रह जाते… आप यह भी सोच रहे होंगे कि इस बार स्टार ब्लॉगर से नए तेवर और नए प्रभाव की रचनाएं अपेक्षित थी… जो मील का पत्थर बनती…. पूर्णिमा वर्मन,मीनाक्षी धन्वन्तरी,समीरलाल समीर, जी के अवधिया, अविनाश वाचस्पति,रंजना रंजू भाटिया, कृष्ण कुमार यादव,आकांक्षा यादव,ललित शर्मा, वन्दना गुप्ता,सुभाष राय,दिविक रमेश और रश्मि जी के अलावे कोई बड़ा ब्लॉगर नहीं दिखे हैं…..  आप यह भी सोच रहे होंगे कि सम्मानित नहीं करना या होना पृथक है और उत्सव में रचनाओं के माध्यम से शामिल होना पृथक बात है….यह उत्सव तो अच्छी रचनाओं को एक स्थान पर पढने जैसा है…. इसके अलावा भी कुछ प्रश्न आपके मन में होंगे….हम चाहते हैं कि आप उसे खुलकर शेयर करें ताकि हम खुद अपनी आलोचना के इस नए प्रारूप में शामिल हो सकें !
यह सही है कि जिन पुराने मित्रों को आप इस उत्सव में नहीं देख पा रहे हैं वे सम्मानित हो चुके हैं और उनकी इच्छा है कि अन्य प्रतिभागियों को ज्यादा मौक़ा मिले .  
एक और समस्या आ रही है नए लोग जो रचनाएँ भेज रहे हैं वह स्तरीय नहीं है, उनकी रचनाओं पर मेहनत करनी पड़  रही है….रही उत्साह की बात तो आंकड़े बता रहे हैं कि विगत वर्ष से ज्यादा विजिट है इस बार उत्सव में, आपको इसलिए नहीं दिख रहा होगा कि आप टिप्पणियों को गिन रहे होंगे ..विगत वर्ष बेनामी और डम्मी टिप्पणियों पर पाबंदी नहीं थी,इस बार है ….!
उत्सव के महज दस दिनों में परिकल्पना ब्लॉगोत्सव के अंतर्गत अबतक 150 से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत की जा चुकी है . और औसत २० प्रतिक्रियाएं प्रीति पोस्ट प्राप्त हुयीं है . विगत वर्ष उत्सव के दौरान औसत विजिट प्रतिदिन 700 से  800 था, जबकि इस बार 1300 से 1800 है जो अपने आप में इसकी सफलता की कहानी कह रहा है !
 दुआ कीजिये उत्सव इसबार भी एक नए आयाम को प्राप्त करे !

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