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ये धागा है प्रेम का , मत तोड़ो चटकाय.....ममता व्यास, भोपाल

Written By ब्‍लोग चौपाल on Wednesday, 2 May 2012 | 08:13


पिछले दिनों बहुत सी शादियों में जाने का अवसर मिला | कितने खुश होते है, सब शादियों में | जिनकी हो रही है |वो भी और जो शादियों में मेहमान बन कर आते हैं वो सब भी | खूब आनन्द और उल्लास का माहौल रहता है | और फिर सभी वर -वधु को उनके वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामनाएं देकर अपने -अपने घर चले जाते है | हमारी हिंदी फिल्मों में भी अंत में सभी किरदार आपस में मिल जाते है | सभी के विवाह हो जाते है | और फिल्म का "दी एंड" हो जाता है | अक्सर सोचती हूँ | क्या विवाह हो जाना ही सुख , ख़ुशी और आनन्द की गारंटी है | यदि हाँ तो फिर आये दिन विवाह टूट क्यों रहे हैं ?क्यों वकीलों और काउंसलरों के दरवाजे खटखटाए जा रहे हैं ? पहले अपने लिए योग्य साथी की तलाश | फिर विवाह का खर्चा और फिर विवाह को बचाने की कवायद | विवाह में होने वाले खर्चे से ज्यादा है महंगा है विवाह को बचाना |टूटते रिश्ते , बढ़ती दूरियाँ अवसाद ,निराशा , अकेलापन और मानसिक तनाव का पर्याय बन गए हैं विवाह | लेकिन संतोषजनक बात ये है की , मनोविज्ञान में एक ऐसी चिकित्सा विधि है जिसके द्वारा विवाह या टूटते रिश्तों को फिर से जोड़ने की कोशिश की जाती है | चलिए जानते है क्या है वैवाहिक चिकित्सा विधि औरकैसे की जाती है, क्लायंट की चिकित्सा | वैवाहिकी चिकित्सा इक़ तरह की समूह चिकित्सा है | जो पारिवारिक चिकित्सा के बहुत करीब है | इस चिकित्सा विधि में पति और पत्नी के बीच के पारस्परिक संबंधों को उत्तम बनाने का प्रयास किया जाता है | इन दिनों देश विदेशों में हजारों महिला और पुरुष अपने विवाह को बचाने या उससे छुटकारा पाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं | विवाह के अलावा आजकल आज बिना विवाह के भी इक़ दूजे के साथ रहने की रीत चल पड़ी है | पुरुष और महिला बिना विवाह किये साथ -साथ रहते हैं | इसलिए आजकल वैवाहिकी चिकित्सा की जगह मनोवैज्ञानिकों द्वारा युग्म चिकित्सा यानि" कपल थेरेपी "का प्रयोग अधिक किया जाता है | युग्म चिकित्सा में विवाहित जोड़े , अविवाहित जोड़े , समलिंगी जोड़े तीनों ही तरह के लोगो का उपचार किया जाता है |


युग्म चिकित्सा में दोनों सहयोगियों को अक्सर इक़ साथ बुलाया जाता है | और उनकी बातों को ध्यान से सुना जाताहै और समाधान निकाले जाते हैं | मनोचिकित्सकों की कोशिश यही होती है की जोड़ियों के आपस में सम्बन्ध उन्नत बने | इस चिकित्सा विधि में कई तरह के उपागम या एप्रोचेस का उपयोग किया जाता है | जोड़ियों को एक दूजे की बाते सुनने के लिए रोजेरियन प्रविधि का उपयोग कराया जाता है | इस उपागम में एक दूसरे की प्रतिक्रियाओं के बीच स्पष्टीकरण करने में मदद करते हैं | इससे भविष्य में दोनों के बीच उत्तम सम्बन्ध बनने की नींव मजबूत हो | दूसरे उपागम में व्यवहार चिकित्सा का उपयोग किया जाता है | इसमे युगल जोड़ी को वांछित व्यवहारों को पुनर्बलित करना सिखलाया जाता है |
तथा अवांछित व्यवहार को हटाने की प्रेरणा दी जाती है | इस सिलसिले में मार्गोलिन तथा विस १९७५ ने युग्मों {कपल } के लिए सरंचित व्यवहार चिकित्सा का उपयोग किया | जिसमे छह अवस्थाओं या चरणों पर विचार किया जाता है | और जिसे पूरा करने में करीब ढाई महीने का समय लगता है | ये महत्वपूर्ण अवस्थाएं हैं निम्न हैं, पहली अवस्था में कपल जोड़ी के समस्यात्मक व्यवहार तथा सभी कारणों की पहचान करते हैं | दूसरी अवस्था या चरण में दोनों साथियों के बीच टूटे हुए सवांद को फिर से कायम करना है | बातचीत के रास्ते फिर से खुले , इसके लिए चिकित्सक-- माडलिंग , व्यवहारपरक रिहर्सल तथा विडिओ फीडबेक का सहारा लेते हैं | अगले चरण में चिकित्सक युगल जोड़ी को मानसिक संघर्ष का समाधान करने को कहते हैं | इसके अगले चरण में सिखाया जाता है की अच्छा व्यव्हार कैसे किया जाए ? अच्छे व्यवहार पर पुरूस्कार और गलत व्यवहार पर दंड दिया जाता है | मनोचिकित्सकों की कोशिश होती है की ,पति और पत्नी या दोनों साथी एकदूजे की अच्छाइयों को देखे | नाकि उन बातों को जिनसे वे असहमत हैं | चौथी अवस्था को चिकित्सको ने अतिमहत्वपूर्ण माना है | इसमे युगल संचार कौशल सीखता है | तथा एक दूसरे के साथ संतोषजनक सम्बन्ध बनाता है | अन्तिम चरण में , जोड़ी के बीच अनुबंध किया जाता है | धीरे -धीर वे समझने लगते हैं एवं अपनी भूमिका के प्रति सचेत रहते हैं | इस तरह ये चरण पूरे होते हैं |
अब महत्वपूर्ण सवाल ये उठता है की , क्या किसी विवाह या रिश्ते को बचाने के लिए कोई प्रविधि या चिकित्सा विधि कामगार हो सकती है ? क्या कोई टेक्निक किसी सम्बन्ध को मजबूत कर सकती है ? घनिष्ट बना सकती है ? इस सवाल का जवाब हमें मनोचिकित्सक कुकरली { १९८०} देते हैं | मनोचिकित्सक कुकरली ने ३२० ऐसे क्लायंटों का पांच सालों तक अनुसरण किया | जिन्होनें वैवाहिक चिकित्सा का लाभ लिया था | तथा उनके सम्बन्ध विच्छेद दर को भी देखा गया | ऐसे केसेज में जिसमे दोनों सहयोगियों को वैवाहिक चिकित्सा इक़ साथ मिली थी |५६.४५% युग्म या कपल पांच सालों तक वैवाहिक जीवन बिता चुके थे तथा जिन केसेज म अन्य दूसरे तरह की चिकित्सा दी गयी | केवल २९% ही पांच साल तक विवाहित जीवन बिता सके |
इन सभी निष्कर्ष की संपुष्टि गुरमैन, कनिस्कर्ण तथा पिनसोफ़ द्वारा इस क्षेत्र में किये गए अध्ययनों की समीक्षा से भी मिलता है | यही नहीं इस चिकित्सा विधि द्वारा विषाद , एगोरा -फोबिया तथा अल्कोहल के दुरूपयोग आदि का उपचार भी किया जाता है | इस बात से स्पष्ट हो जाता है, की वैवाहिक चिकित्सा जो इक़ प्रकार की पारिवारिक चिकित्सा है | इस विधि से बहुत हद तक वैवाहिक संकट को दूर करके वैवाहिक संबंधों को उन्नत बनाने में काफी मदद मिलती है | और अंत में - विवाह इक़ प्रेम से बुना हुआ धागा है इसे प्रेम से सहेजना होगा | ये धागा है विश्वास का , इसे मत तोड़ो चटकाय....ममता व्यास, भोपाल

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