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Written By ब्‍लोग चौपाल on Thursday, 17 May 2012 | 09:10

Thursday, 17 May 2012

हम विचार और व्‍यवहार से पहचाने जाते है। विचार हमारे मन मस्तिष्‍क का हिस्‍सा है जो दिखाई नहीं देता पर जनित व्‍यवहार दिखाई देता है और अनुभव भी किया जाता है।


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Written By ब्‍लोग चौपाल on Wednesday, 16 May 2012 | 08:14

Wednesday, 16 May 2012

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आपका वोट हमारे लिए महत्वपूर्ण है ।

इस वर्ष के समापन के साथ ही हिन्दी ब्लॉग जगत नए दशक मे प्रवेश कर जाएगा, इसलिए परिकल्पना समूह के द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि परिकल्पना सम्मान के साथ दशक के श्रेष्ठ पाँच ब्लॉग और दशक के श्रेष्ठ पाँच ब्लॉगर का भी सारस्वत सम्मान किया जाये। इसके लिए आपका वोट हमें दिशा देगा । हिचकिचाइए मत, अपना वोट अवश्य दीजिये .....आपका वोट हमारे लिए महत्वपूर्ण है ।

परिकल्पना सम्मान-2011 हेतु आपका मत

जैसा की आप सभी को विदित है कि आगामी अगस्त-2012 के प्रथम सप्ताहांत मे परिकल्पना सम्मान के अंतर्गत 51 हिन्दी चिट्ठाकारों का सारस्वत सम्मान प्रस्तावित है, जिसमें ब्लोगोत्सव-2011 मे शामिल रचनाकारों में से कविता, गजल, गीत,विज्ञान,आलेख, साक्षात्कार आदि वर्गों से 41 चिट्ठाकारों का चयन किया जा रहा है शेष 10 चिट्ठाकारों का चयन आपके द्वारा दिये गए मतों के आधार पर दिया जाएगा, जो इसप्रकार है : ध्यान दें : मत देने की आखिरी तिथि है 30 मई-2012, उसके बाद प्राप्त मतों को गणना से बाहर रखा जाएगा।







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ब्लॉग पर कैसा साहित्य देखना चाहते हैं आप ?


मैं हिंदी साहित्य के पुरोधाओं से यह जानना चाहता हूँ कि ब्लॉग पर कैसा साहित्य देखना चाहते हैं आप ?

यहीं से मैं अपनी बात की शुरुआत कर रहा हूँ कि .आज भले ही हिंदी साहित्य ब्लॉग पर अपनी शैशवास्था में हो पर आने वाला समय निश्चित रूप से उसी का है। वर्तमान में हिंदी के साहित्यकारों की पहुंच भी इन ब्लॉगों पर लगभग 10 प्रतिशत के आसपास ही है। लेकिन इंटरनेट उपयोगकर्त्ताओं की बढ़ती संख्या आश्वस्त  करती है कि हिंदी का दायरा अब देश की सीमाएं लांघकर दुनिया भर में अपनी पैठ बना रहा है। साहित्य की तरह ही  ब्लॉग लेखन भी सृजनात्मकता के दायरे में आ चुका है  , इसका उद्देश्य  "स्वान्त:सुखाय" नही रहा, इसके केंद्र  में  मनुष्य की सामूहिक चिंताएं आ गयी है और  व्यक्तिगत मनोविनोद, जय-पराजय, सुख-दुख से ऊपर  सामूहिक प्रेम, बन्धुत्व, स्वतंत्रता और समानता का साहित्य इसपर प्रस्तुत किया जा रहा है  !नये मूल्यों  के अनुरूप वर्ग, वर्ण  और जातियों के बीच की दूरियां घटाई जा रही है ।

इसपर स्त्री-पुरूष सम्बन्धों की परिभाषाएं बदली है,  लिंगगत समानता आई है ।  सामाजिक सरोकार बढे हैं ।  भाषा की दृष्टि से  कठिन शब्दों का प्रचलन कम हुआ है । विधा की दृष्टि से कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, संस्मरण, यात्रावृत्त आदि विधाएं इसपर  बदस्तूर जारी है । हिन्दी तो आज विश्व बाजार की भाषा के रूप में स्वीकृत हो चुकी है, किन्तु साहित्य की सीमा सिमटती जा रही है, जिसे हम शुद्ध साहित्य कहते हैं, उसका दायरा केवल अकादमिक सीमा तक ही रह गया है।

साहित्य के पुरोधा गण ब्लॉग को चाहे जितना भी कोस लें, पर भाषा, साहित्य और संस्कृति की भूमि को जितना उर्वर इस नए माध्यम के द्वारा बनाया जा रहा  है, उतना साहित्य के अन्य माध्यमों के द्वारा  नहीं। हम आप जिसे साहित्य कहते हैं, यदि साहित्य केवल वही है, तो यह तय है कि आज के भ्रष्ट  और पतनशील राजनीतिक दौर में जितना कारगार और तात्कालिक हस्तक्षेप ब्लॉग  कर पा रहा है,उतना साहित्य के द्वारा सम्भव नही है। यह वक्त का ऐतिहासिक तकाजा है कि ब्लॉग-लेखन की अहमियत को समझा और स्वीकार किया जाये। वैसे शुद्धतावादियों के बाद और बावजूद उसकी अहमियत स्थापित हो चुकी है।


.आज आवश्यकता इस बात की है कि ब्लॉग पर उपलब्ध साहित्य को भी गंभीर व विचार योग्य साहित्य माना जाए। आलोचक, समीक्षक इन विभिन्न ब्लॉग पर उपलब्ध साहित्य पर विचार कर अपनी महत्वपूर्ण राय दें। इस साहित्य पर उनके सटीक विश्लेषण से ब्लॉगर्स को भी लाभ होगा। वहीं हिंदी ब्लॉग लेखन के स्तर में अपेक्षित सुधार होगा।सम्भव है आने वाले दिनों में ये क्षद्म कुंठाएं खुद-ब-खुद मिट जायें और ब्लॉग केवल साहित्य बनकर मुख्यधारा में शामिल हो जाये।
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सफलता की खुशबू की खनक बड़ी गहरी होती है !

Written By ब्‍लोग चौपाल on Wednesday, 2 May 2012 | 10:09

Wednesday, 2 May 2012

रवीन्द्र प्रभात
साझा संवाद,साझी विरासत,साझी धरोहर, साझा मंच आप जो मान लीजिये परिकल्पना ब्लॉगोत्सव  की एक कैफियत यह भी है . दरअसल हमारी असली ताक़त आप है और आपकी पसंद ,इच्छा, अनुभूति और सरोकार के अनुरूप ही हम प्रतिदिन कुछ न कुछ नया लेकर आते हैं, ताकि आप हंमारी अनुभूतियों में अपनी अनुभूतियों को पूरे गर्मजोशी के साथ शामिल कर सकें, क्योंकि मेरा मानना है कि सामूहिकता की सांस में सफलता की खुशबू की खनक बड़ी गहरी होती है . इससे हमारा मान भी बढ़ता है और मनोबल भी . 
संभव है कि जो लोग सरसरी निगाह से इस उत्सव को देख-सुन रहे होंगे उन्हें इस वर्ष पिछले वर्ष जैसा उत्साह भी नहीं दिख रहा होगा … विवधता नहीं दिख रही होगी .. भागीदारी नहीं दिख रही होगी … उन्हें यह भी महसूस हो रहा होगा कि कुछ रचनाकार एक हफ्ते में कई बार आ गए… उनके द्वारा  रचनाओं की कमी का अंदाजा लगाया जा रहा होगा … और आधार भी संकुचित दिख रहा होगा …. उनके कुछ पुराने ब्लोगर मित्र इस बार नहीं दिख रहे होंगे .. उन्हें उनकी अनुपस्थिति चौकाने वाली दिख रही होगी …. पाठको की संख्या भी न्यूनतम महसूस हो रही होगी … उन्हें लग रहा होगा कि इस से अधिक पाठक तो आम मौके और आम ब्लॉग पर पहुच जाते हैं….आदि-आदि !
आज मैं आपके मन की बात को लेकर उपस्थित हूँ . आप सोच रहे होंगे कि एक बार फिल्मफेयर या राष्ट्रीय पुरस्कार पा कर यदि फिल्मे बनना छोड़ दे तो मुझे लगता है हम ढेर सारी अच्छी फिल्मों से वंचित रह जाते… आप यह भी सोच रहे होंगे कि इस बार स्टार ब्लॉगर से नए तेवर और नए प्रभाव की रचनाएं अपेक्षित थी… जो मील का पत्थर बनती…. पूर्णिमा वर्मन,मीनाक्षी धन्वन्तरी,समीरलाल समीर, जी के अवधिया, अविनाश वाचस्पति,रंजना रंजू भाटिया, कृष्ण कुमार यादव,आकांक्षा यादव,ललित शर्मा, वन्दना गुप्ता,सुभाष राय,दिविक रमेश और रश्मि जी के अलावे कोई बड़ा ब्लॉगर नहीं दिखे हैं…..  आप यह भी सोच रहे होंगे कि सम्मानित नहीं करना या होना पृथक है और उत्सव में रचनाओं के माध्यम से शामिल होना पृथक बात है….यह उत्सव तो अच्छी रचनाओं को एक स्थान पर पढने जैसा है…. इसके अलावा भी कुछ प्रश्न आपके मन में होंगे….हम चाहते हैं कि आप उसे खुलकर शेयर करें ताकि हम खुद अपनी आलोचना के इस नए प्रारूप में शामिल हो सकें !
यह सही है कि जिन पुराने मित्रों को आप इस उत्सव में नहीं देख पा रहे हैं वे सम्मानित हो चुके हैं और उनकी इच्छा है कि अन्य प्रतिभागियों को ज्यादा मौक़ा मिले .  
एक और समस्या आ रही है नए लोग जो रचनाएँ भेज रहे हैं वह स्तरीय नहीं है, उनकी रचनाओं पर मेहनत करनी पड़  रही है….रही उत्साह की बात तो आंकड़े बता रहे हैं कि विगत वर्ष से ज्यादा विजिट है इस बार उत्सव में, आपको इसलिए नहीं दिख रहा होगा कि आप टिप्पणियों को गिन रहे होंगे ..विगत वर्ष बेनामी और डम्मी टिप्पणियों पर पाबंदी नहीं थी,इस बार है ….!
उत्सव के महज दस दिनों में परिकल्पना ब्लॉगोत्सव के अंतर्गत अबतक 150 से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत की जा चुकी है . और औसत २० प्रतिक्रियाएं प्रीति पोस्ट प्राप्त हुयीं है . विगत वर्ष उत्सव के दौरान औसत विजिट प्रतिदिन 700 से  800 था, जबकि इस बार 1300 से 1800 है जो अपने आप में इसकी सफलता की कहानी कह रहा है !
 दुआ कीजिये उत्सव इसबार भी एक नए आयाम को प्राप्त करे !
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ये धागा है प्रेम का , मत तोड़ो चटकाय.....ममता व्यास, भोपाल


पिछले दिनों बहुत सी शादियों में जाने का अवसर मिला | कितने खुश होते है, सब शादियों में | जिनकी हो रही है |वो भी और जो शादियों में मेहमान बन कर आते हैं वो सब भी | खूब आनन्द और उल्लास का माहौल रहता है | और फिर सभी वर -वधु को उनके वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामनाएं देकर अपने -अपने घर चले जाते है | हमारी हिंदी फिल्मों में भी अंत में सभी किरदार आपस में मिल जाते है | सभी के विवाह हो जाते है | और फिल्म का "दी एंड" हो जाता है | अक्सर सोचती हूँ | क्या विवाह हो जाना ही सुख , ख़ुशी और आनन्द की गारंटी है | यदि हाँ तो फिर आये दिन विवाह टूट क्यों रहे हैं ?क्यों वकीलों और काउंसलरों के दरवाजे खटखटाए जा रहे हैं ? पहले अपने लिए योग्य साथी की तलाश | फिर विवाह का खर्चा और फिर विवाह को बचाने की कवायद | विवाह में होने वाले खर्चे से ज्यादा है महंगा है विवाह को बचाना |टूटते रिश्ते , बढ़ती दूरियाँ अवसाद ,निराशा , अकेलापन और मानसिक तनाव का पर्याय बन गए हैं विवाह | लेकिन संतोषजनक बात ये है की , मनोविज्ञान में एक ऐसी चिकित्सा विधि है जिसके द्वारा विवाह या टूटते रिश्तों को फिर से जोड़ने की कोशिश की जाती है | चलिए जानते है क्या है वैवाहिक चिकित्सा विधि औरकैसे की जाती है, क्लायंट की चिकित्सा | वैवाहिकी चिकित्सा इक़ तरह की समूह चिकित्सा है | जो पारिवारिक चिकित्सा के बहुत करीब है | इस चिकित्सा विधि में पति और पत्नी के बीच के पारस्परिक संबंधों को उत्तम बनाने का प्रयास किया जाता है | इन दिनों देश विदेशों में हजारों महिला और पुरुष अपने विवाह को बचाने या उससे छुटकारा पाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं | विवाह के अलावा आजकल आज बिना विवाह के भी इक़ दूजे के साथ रहने की रीत चल पड़ी है | पुरुष और महिला बिना विवाह किये साथ -साथ रहते हैं | इसलिए आजकल वैवाहिकी चिकित्सा की जगह मनोवैज्ञानिकों द्वारा युग्म चिकित्सा यानि" कपल थेरेपी "का प्रयोग अधिक किया जाता है | युग्म चिकित्सा में विवाहित जोड़े , अविवाहित जोड़े , समलिंगी जोड़े तीनों ही तरह के लोगो का उपचार किया जाता है |


युग्म चिकित्सा में दोनों सहयोगियों को अक्सर इक़ साथ बुलाया जाता है | और उनकी बातों को ध्यान से सुना जाताहै और समाधान निकाले जाते हैं | मनोचिकित्सकों की कोशिश यही होती है की जोड़ियों के आपस में सम्बन्ध उन्नत बने | इस चिकित्सा विधि में कई तरह के उपागम या एप्रोचेस का उपयोग किया जाता है | जोड़ियों को एक दूजे की बाते सुनने के लिए रोजेरियन प्रविधि का उपयोग कराया जाता है | इस उपागम में एक दूसरे की प्रतिक्रियाओं के बीच स्पष्टीकरण करने में मदद करते हैं | इससे भविष्य में दोनों के बीच उत्तम सम्बन्ध बनने की नींव मजबूत हो | दूसरे उपागम में व्यवहार चिकित्सा का उपयोग किया जाता है | इसमे युगल जोड़ी को वांछित व्यवहारों को पुनर्बलित करना सिखलाया जाता है |
तथा अवांछित व्यवहार को हटाने की प्रेरणा दी जाती है | इस सिलसिले में मार्गोलिन तथा विस १९७५ ने युग्मों {कपल } के लिए सरंचित व्यवहार चिकित्सा का उपयोग किया | जिसमे छह अवस्थाओं या चरणों पर विचार किया जाता है | और जिसे पूरा करने में करीब ढाई महीने का समय लगता है | ये महत्वपूर्ण अवस्थाएं हैं निम्न हैं, पहली अवस्था में कपल जोड़ी के समस्यात्मक व्यवहार तथा सभी कारणों की पहचान करते हैं | दूसरी अवस्था या चरण में दोनों साथियों के बीच टूटे हुए सवांद को फिर से कायम करना है | बातचीत के रास्ते फिर से खुले , इसके लिए चिकित्सक-- माडलिंग , व्यवहारपरक रिहर्सल तथा विडिओ फीडबेक का सहारा लेते हैं | अगले चरण में चिकित्सक युगल जोड़ी को मानसिक संघर्ष का समाधान करने को कहते हैं | इसके अगले चरण में सिखाया जाता है की अच्छा व्यव्हार कैसे किया जाए ? अच्छे व्यवहार पर पुरूस्कार और गलत व्यवहार पर दंड दिया जाता है | मनोचिकित्सकों की कोशिश होती है की ,पति और पत्नी या दोनों साथी एकदूजे की अच्छाइयों को देखे | नाकि उन बातों को जिनसे वे असहमत हैं | चौथी अवस्था को चिकित्सको ने अतिमहत्वपूर्ण माना है | इसमे युगल संचार कौशल सीखता है | तथा एक दूसरे के साथ संतोषजनक सम्बन्ध बनाता है | अन्तिम चरण में , जोड़ी के बीच अनुबंध किया जाता है | धीरे -धीर वे समझने लगते हैं एवं अपनी भूमिका के प्रति सचेत रहते हैं | इस तरह ये चरण पूरे होते हैं |
अब महत्वपूर्ण सवाल ये उठता है की , क्या किसी विवाह या रिश्ते को बचाने के लिए कोई प्रविधि या चिकित्सा विधि कामगार हो सकती है ? क्या कोई टेक्निक किसी सम्बन्ध को मजबूत कर सकती है ? घनिष्ट बना सकती है ? इस सवाल का जवाब हमें मनोचिकित्सक कुकरली { १९८०} देते हैं | मनोचिकित्सक कुकरली ने ३२० ऐसे क्लायंटों का पांच सालों तक अनुसरण किया | जिन्होनें वैवाहिक चिकित्सा का लाभ लिया था | तथा उनके सम्बन्ध विच्छेद दर को भी देखा गया | ऐसे केसेज में जिसमे दोनों सहयोगियों को वैवाहिक चिकित्सा इक़ साथ मिली थी |५६.४५% युग्म या कपल पांच सालों तक वैवाहिक जीवन बिता चुके थे तथा जिन केसेज म अन्य दूसरे तरह की चिकित्सा दी गयी | केवल २९% ही पांच साल तक विवाहित जीवन बिता सके |
इन सभी निष्कर्ष की संपुष्टि गुरमैन, कनिस्कर्ण तथा पिनसोफ़ द्वारा इस क्षेत्र में किये गए अध्ययनों की समीक्षा से भी मिलता है | यही नहीं इस चिकित्सा विधि द्वारा विषाद , एगोरा -फोबिया तथा अल्कोहल के दुरूपयोग आदि का उपचार भी किया जाता है | इस बात से स्पष्ट हो जाता है, की वैवाहिक चिकित्सा जो इक़ प्रकार की पारिवारिक चिकित्सा है | इस विधि से बहुत हद तक वैवाहिक संकट को दूर करके वैवाहिक संबंधों को उन्नत बनाने में काफी मदद मिलती है | और अंत में - विवाह इक़ प्रेम से बुना हुआ धागा है इसे प्रेम से सहेजना होगा | ये धागा है विश्वास का , इसे मत तोड़ो चटकाय....ममता व्यास, भोपाल
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सृजन का सुख अकथनीय होता है


रवीन्द्र प्रभातसृजन का सुख अकथनीय होता है . इस सुख को शब्दों की सीमा में बंधकर जाना नही जा सकता. और जो सृजन सूक्ति की शक्ल अख्तियार कर ले तो क्या कहने . सृजन की ताकत असीम होती है और अर्थवान भी. यह संवाद कायम करती है,आपस में जोड़ती है, बिगड़ जाए तो दूरी पैदा करती है , भावनात्मक एकता का अद्भुत संगम बना सकती है . वसुधैव कुटुंबकम का सपना साकार करा सकती है. इसे साध लिया तो हर मंजिल आसान हो जाती है .
एक अवसर मिला है हर किसी को इस उत्सव के माध्यम से सृजन को  साधने की . सृजन की ताकत को पहचानने की और वक़्त के साथ अपने कदमों को दृढ़ता के साथ प्रगति की दिशा में ले चलने की . ब्लॉगोत्सव एक शुरुआत है , इसे मजबूत आधार आपको प्रदान करना है अपने सृजन की ताकत से …!
विविधता में एकता को प्रतिष्ठापित करने के उद्देश्य से इस उत्सव की परिकल्पना की गयी थी. आशाओं के अनुरूप हिंदी चिट्ठाकारों ने इसका समर्थन ही नहीं किया, अपितु इसकी सफलता की कामना भी की. परिणाम आपके सामने है . प्रत्येक ने एकरूपता की नहीं , अपितु एकता की कामना की है . यही कारण है कि इस दिशा में हमारी प्रतिबद्धता एक नए मुकाम की ओर अग्रसर है …!
यदि आप अभी तक इस कारबां में शामिल नही हुए हैं तो शर्माईये मत आईए इस कारबां में शामिल होकर दीजिये अपने सृजन को एक नई धार….परिकल्पना ब्लॉगोत्सव के साथ !
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हिंदी टाइप के लिए 10 ऑनलाइन पते

Written By ब्‍लोग चौपाल on Friday, 27 April 2012 | 07:43

Friday, 27 April 2012

हिंदी में लिखना अब बहुत आसान है आप अंग्रेजी में टाइप करके ही हिंदी प्राप्त कर सकते है । इस काम को करने के लिए कुछ अच्छे सॉफ्टवेयर तो है ही जिनके उपयोग से आप अपने कंप्यूटर में हिंदी टाइप कर सकते है और बहुत से ऑनलाइन औजार और वेबसाइट्स भी है जिनके उपयोग से आप हिंदी लिख सकते हैं और कॉपी करके इसका उपयोग अपनी जरुरत के अनुसार कर सकते हैं ।
ऐसे ही 10 ऑनलाइन पते जहाँ से आप अंग्रेजी लिख कर हिंदी प्राप्त कर सकते हैं ये रहे
इनमें से ज्यादातर टूल आपको फ़ोनेटिक हिंदी टाइपिंग की सुविधा देते है जैसे “राम” टाइप करने के लिए “ram” टाइप करें और स्पेसबार दबाएँ ।
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